जनता के लिए मददगार ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम, अब तक लाखों को फायदा

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देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसमाधान का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है. इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार सीधे जनता के द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रही है. 5 फरवरी तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 574 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से 12 कैंप गुरुवार को आयोजित किए गए. इन कैंपों के माध्यम से अब तक 455790 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है जबकि गुरुवार को अकेले 13489 लोगों ने कैंपों में अपनी समस्याएं, शिकायतें और आवेदन प्रस्तुत किए.

कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 44602 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 30089 शिकायतों का सफल निस्तारण किया जा चुका है. यह आंकड़े राज्य सरकार की समाधान के साथ शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 64155 आवेदन प्राप्त हुए हैं. 252334 नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया है. विशेष रूप से समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पेंशन, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं में बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थियों को सहायता मिली है.

सरकार का दायित्व केवल नीतियां बनाना नहीं: CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा कि सरकार का दायित्व केवल नीतियां बनाना नहीं बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना है. ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ इसी सोच का परिणाम है. यह कार्यक्रम दूरस्थ, पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो रहा है, जहां अधिकारी खुद जाकर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं. इससे न केवल प्रशासन पर जनता का विश्वास बढ़ा है बल्कि उत्तराखंड सुशासन के मॉडल राज्य के रूप में नई पहचान भी बना रहा है.

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