Indira Ekadashi 2026: इंदिरा एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, भगवान विष्णु के साथ पितरों की भी मिलेगी कृपा! जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

नैनीताल. हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य प्राप्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. महालय पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से केवल भगवान की कृपा ही नहीं, बल्कि पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है.

 

उत्तराखंड के नैनीताल निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि  पंचांग के अनुसार 6 अक्टूबर को एकादशी तिथि मध्य रात्रि 12:35 बजे तक रहेगी. अश्लेषा नक्षत्र रात 10:17 बजे तक रहेगा. वहीं सिद्धि योग सुबह 7:20 बजे तक रहेगा. इस दौरान चंद्रमा रात 10:17 बजे तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे. खास बात यह है कि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:11 बजे से रात 10:17 बजे तक रहेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए शुभ कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में इस बार इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है.

 

पितरों की प्रसन्नता के लिए क्यों खास है इंदिरा एकादशी?

 

मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. व्रत से प्राप्त पुण्य को पितरों को समर्पित करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि महालय पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को पितरों की मुक्ति के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में इंदिरा एकादशी की कथा का श्रवण करना भी महत्वपूर्ण है. कथा सुने बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता. इसलिए श्रद्धालुओं को पूजा के साथ कथा श्रवण करने की परंपरा निभाने की सलाह दी जाती है.

 

भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी इंदिरा एकादशी की कथा

 

इंदिरा एकादशी का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मति नगरी में राजा इंद्रसेन राज्य करते थे. वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और अपनी प्रजा का पालन अपनी संतान की तरह करते थे. एक दिन महर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे. उन्होंने राजा को बताया कि उनके पिता पिछले जन्म में किसी भूल के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं. पिता की मुक्ति के लिए राजा को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने और उससे प्राप्त पुण्य अपने पिता को समर्पित करने की सलाह दी गई. राजा इंद्रसेन ने नारद मुनि के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत किया और व्रत से प्राप्त पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया. धार्मिक कथा के अनुसार इसके फलस्वरूप उनके पिता को यमलोक से मुक्ति मिली और भगवान विष्णु के पार्षद उन्हें विष्णु लोक ले गए. इसी कारण इंदिरा एकादशी को पितरों की मुक्ति और मोक्ष की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, कथा श्रवण और पितरों के निमित्त पुण्य कर्म कर सकते हैं.

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