Nainital News: 20 मिनट में बुझी ‘जंगल की आग’: नैनीताल में वन विभाग की मेगा मॉक ड्रिल, 200 से ज्यादा कर्मियों ने संभाला मोर्चा

मॉक ड्रिल का संचालन उप प्रभागीय वनाधिकारी एवं इंसिडेंट कमांडर ममता चंद के नेतृत्व में किया गया. काल्पनिक सूचना दी गई कि नैना रेंज के लडियाकांटा बीट के कक्ष संख्या 3 और 4 में किसी व्यक्ति की लापरवाही से जंगल में आग लग गई है. सूचना मिलते ही गठित टास्क फोर्स टीमों को स्टेजिंग एरिया से तत्काल मौके पर रवाना किया गया.

by Unfiltered Uttarakhand Desk
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नैनीताल. आगामी गर्मी के मौसम में संभावित वनाग्नि से निपटने की तैयारी को लेकर नैनीताल वन प्रभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया. उप वन संरक्षक आकाश गंगवार के निर्देशन में प्रभाग स्तर पर व्यापक वनाग्नि मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के लगभग 200 अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लेकर आपदा प्रबंधन की संयुक्त क्षमता का प्रदर्शन किया.

 

मॉक ड्रिल का संचालन उप प्रभागीय वनाधिकारी एवं इंसिडेंट कमांडर ममता चंद के नेतृत्व में किया गया. काल्पनिक सूचना दी गई कि नैना रेंज के लडियाकांटा बीट के कक्ष संख्या 3 और 4 में किसी व्यक्ति की लापरवाही से जंगल में आग लग गई है. सूचना मिलते ही गठित टास्क फोर्स टीमों को स्टेजिंग एरिया से तत्काल मौके पर रवाना किया गया. वन क्षेत्र अधिकारियों ललित मोहन कार्की, विजय भट्ट, योगेश चंद तिवारी, मनोज भगत, आनंद लाल और प्रशिक्षु वन क्षेत्राधिकारी अभय जोशी ने टीमों का नेतृत्व किया.

 

घायलों को किया गया रेफर

टीमें करीब 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचीं और फायर लाइन तथा कंट्रोल फायर तकनीक के जरिए आग पर काबू पा लिया. इस दौरान घायल लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक उपचार देकर बी.डी. पांडे चिकित्सालय रेफर किया. पूरे अभियान के दौरान वन विभाग और पुलिस संचार केंद्र सक्रिय रहे तथा वायरलेस, बेस सिस्टम, रेंज कंट्रोल रूम, नैना पीक रिपीटर सेंटर और देहरादून स्थित आईसीसीसी सेंटर से लगातार समन्वय स्थापित किया गया.

 

बेहतर तालमेल के लिए जरूरी मॉक ड्रिल

अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व, विद्युत, लोक निर्माण, पेयजल, बाल विकास, पशुपालन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, उत्तराखंड रिजर्व पुलिस बल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स, राजकीय औद्योगिक संस्थान पाईन्स, महिला स्वयं सहायता समूह और ग्राम जोखिया के ग्रामीणों ने भी सहभागिता की. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और वास्तविक वनाग्नि की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. गर्मियों में बढ़ते फॉरेस्ट फायर के खतरे को देखते हुए इसे बेहद महत्वपूर्ण तैयारी माना जा रहा है.

 

 

 

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