नैनीताल. चैत्र मास की पूर्णिमा इस बार एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आ रही है. 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाया जाने वाला हनुमान जन्मोत्सव कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों का साक्षी बनेगा. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का अनोखा संगम बन रहा है, जो इसे और भी पुण्यदायी और खास बना देता है.
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 2 अप्रैल सुबह 7:42 बजे तक रहेगी. चूंकि पवनपुत्र हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 2 अप्रैल को ही यह पर्व मनाया जाएगा. इस दिन हस्त नक्षत्र शाम 5:39 बजे तक और ध्रुव योग दोपहर 2:19 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:04 बजे तक रहेगा. विशेष बात यह है कि इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में स्थित रहेगा, जो साधना और सेवा के भाव को मजबूत करता है.
क्या उत्तराखंड में हुआ था हनुमान जी का जन्म ?
उत्तराखंड के नैनीताल निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म त्रेतायुग में चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था. उनकी जन्मस्थली को लेकर विभिन्न मत हैं, कर्नाटक के किष्किंधा क्षेत्र, आंध्र प्रदेश के तिरुमाला पर्वत, कर्नाटक के गोकर्ण और उत्तराखंड के गौतम कुंड को प्रमुख स्थानों में माना जाता है. वहीं इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमंत कवच का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है. श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजन और सेवा के माध्यम से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.
हनुमान जयंती की बजाय कहें हनुमान जन्मोत्सव
ज्योतिष आचार्य पंडित प्रकाश जोशी का कहना है कि इस पर्व को “हनुमान जयंती” की बजाय “हनुमान जन्मोत्सव” कहना अधिक उचित है, क्योंकि हनुमान जी अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं और आज भी जीवित माने जाते हैं. इस बार का हनुमान जन्मोत्सव न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों के कारण साधना, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का सुनहरा अवसर भी है.