Nainital News: मेडिकल टूरिज्म की ओर बढ़ता नैनीताल, केंद्रीय बजट से खुल सकती हैं स्वास्थ्य-पर्यटन की नई राहें

नैनीताल. झीलों और शांत पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध सरोवर नगरी नैनीताल अब केवल घूमने-फिरने की जगह भर नहीं रह सकता, बल्कि भविष्य में यह स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार के लिए भी बड़ा केंद्र बन सकता है. हालिया केंद्रीय बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने से जुड़ी घोषणाओं ने कुमाऊं क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं. पर्यटन और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो देश-विदेश से मरीज इलाज और रिकवरी के लिए यहां आने लगेंगे.

बजट में विश्वस्तरीय अस्पताल, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल वैल्यू ट्रैवल हब विकसित करने पर जोर दिया गया है. विदेशी मरीजों के लिए वीज़ा प्रक्रिया आसान बनाने और सिंगल-विंडो सुविधा की पहल भी प्रस्तावित है. इससे पहाड़ी राज्यों, खासकर उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ गई हैं.

ब्रिटिशकाल में आते थे स्वास्थ लाभ लेने

दरअसल, नैनीताल में स्वास्थ्य लाभ के लिए आने की परंपरा नई नहीं है. ब्रिटिशकाल में यहां की जलवायु को रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता था. भवाली स्थित प्रसिद्ध सेनिटोरियम अस्पताल कभी एशिया के प्रमुख टीबी उपचार केंद्रों में गिना जाता था, जहां दूर-दराज से मरीज आते थे. अब यह परिसर जर्जर स्थिति में है, लेकिन इसके पुनरुद्धार को मेडिकल टूरिज्म की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,. स्थानीय होटल एसोसिएशन का कहना है कि यदि इसे आधुनिक अस्पताल में बदला जाए तो लोगों को बरेली, हल्द्वानी या दिल्ली जाने की जरूरत कम हो जाएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

 

नैनीताल बन सकता है बेस्ट रिकवरी डेस्टिनेशन

पर्यटन विभाग भी इसे पर्यटन के नए आयाम के रूप में देख रहा है. अधिकारियों के अनुसार, स्वच्छ हवा, बेहतर एयर क्वालिटी और शांत वातावरण नैनीताल को रिकवरी डेस्टिनेशन बना सकते हैं. यहां योग, आयुष चिकित्सा, प्राकृतिक उपचार, होम-स्टे और वेलनेस रिट्रीट को जोड़कर “हीलिंग टूरिज्म” मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिससे मरीज इलाज के साथ आरामदायक प्रवास भी कर सकेंगे. लोगों का मानना है कि यदि सड़क, आपातकालीन सेवाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और स्वास्थ्य ढांचा मजबूत किया जाए तो पहला इससे पर्यटन सीजन पर निर्भरता घटेगी और दूसरा पहाड़ के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा भी मिल सकेगी.

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