नैनीताल नाम के पीछे छिपी है मां नैना देवी की दिव्य कथा, जानिए क्यों हर साल 23 जून को मनाया जाता है स्थापना दिवस

हर वर्ष 23 जून को मंदिर का स्थापना दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

by Unfiltered Uttarakhand Desk
51 views

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल केवल अपनी खूबसूरत झीलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध धार्मिक और पौराणिक विरासत के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। हर वर्ष 23 जून को मां नैना देवी मंदिर का स्थापना दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

उत्तराखंड के नैनीताल निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार राजा दक्ष प्रजापति ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया। अपने पिता के यज्ञ में पहुंचीं माता सती अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने यज्ञ कुंड में आत्माहुति दे दी। यह समाचार मिलते ही भगवान शिव अत्यंत क्रोधित और व्यथित हो गए। वे माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में विचरण करने लगे।

51 शक्तिपीठों में एक है नयना देवी मंदिर

सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 खंड किए। जहां-जहां ये अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मान्यता है कि माता सती के नयन (आंख) नैनीताल में गिरे थे, जिससे यहां पवित्र नैनी झील का उद्भव हुआ। इसी कारण इस स्थान का नाम ‘नैनीताल’ पड़ा और यहां मां नैना देवी शक्तिपीठ की स्थापना हुई। माता की दूसरी आंख हिमाचल प्रदेश स्थित नैना देवी शक्तिपीठ में गिरने की मान्यता भी प्रचलित है। साल 1880 में नैनीताल में आए भीषण भूस्खलन में प्राचीन नैना देवी मंदिर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया, जो 1883 में पूर्ण हुआ। तभी से हर वर्ष 23 जून को मां नैना देवी मंदिर का स्थापना दिवस श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया जाता है। आज भी नैना देवी मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नैनीताल आने वाला लगभग हर पर्यटक मां के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानता है।

You may also like

उत्तराखंड की हर छोटी-बड़ी खबर की कोरी तस्वीर से आपको रूबरू कराना ही ‘अनफिल्टर्ड उत्तराखंड’ का मकसद है. हम अपने पाठकों और दर्शकों तक निष्पक्ष और सटीक खबरें पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. सही फैक्ट्स के साथ दुरुस्त रिपोर्टिंग के माध्यम से ही हम आपका भरोसा जीत और कायम रख सकते हैं. अपने साथ से हमारे इस छोटे से कदम को आगे बढ़ाने के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद.

© 2026 – Unfiltered Uttarakhand.
Website Developed & Maintained by Shrnkify

Unfiltered Uttarakhand | उत्तराखंड की निष्पक्ष और सटीक ताज़ा खबरें
उत्तराखंड की हर छोटी-बड़ी खबर की कोरी तस्वीर। 'अनफिल्टर्ड उत्तराखंड' आपको देता है सही फैक्ट्स और दुरुस्त रिपोर्टिंग। निष्पक्ष समाचारों के लिए हमसे जुड़ें।