नैनीताल. उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल आने वाले पर्यटकों और यहां रहने वाले स्थानीय लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या शहर में नलों से आने वाला पानी सीधे पीने योग्य है या घरों में वॉटर फिल्टर या आरओ लगाना जरूरी है? पहाड़ी शहर होने के कारण यहां की जल आपूर्ति को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं, खासकर टीडीएस और पथरी जैसी समस्याओं को लेकर.
नैनीताल की पेयजल व्यवस्था झील के पानी पर निर्भर नहीं करती. शहर में पानी झील किनारे स्थापित बोरवेल से एकत्र किया जाता है, जिसे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाकर शुद्धिकरण की पूरी प्रक्रिया से गुजारा जाता है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार सप्लाई से पहले पानी का फिल्ट्रेशन, क्लोरीनेशन और नियमित सैंपल टेस्टिंग की जाती है, ताकि गुणवत्ता मानकों को बनाए रखा जा सके। सामान्य परिस्थितियों में यह पानी उपयोग और पीने के लिए सुरक्षित माना जाता है.
नैनीताल का पानी अच्छी गुणवत्ता का
जल संस्थान के कैमिस्ट योगेंद्र पाल बताते हैं कि नैनीताल का पानी अच्छी गुणवत्ता का है. उनका कहना है कि पानी का टीडीएस (Total Dissolved Solids) 500 से कम है, जो भारतीय मानकों के अनुसार सुरक्षित श्रेणी में आता है. साथ ही पानी का pH स्तर 7.2 से 7.8 के बीच है, जो संतुलित माना जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पथरी की समस्या केवल पानी की वजह से नहीं होती, बल्कि खानपान और जीवनशैली भी अहम भूमिका निभाते हैं.
पानी को उबालकर और छानकर पीना जरूरी
हालांकि लोग यह भी मानते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई जगह पाइपलाइनें पुरानी हैं. बरसात या भूस्खलन के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने या बाहरी गंदगी के मिल जाने की आशंका रहती है, जिससे पानी की गुणवत्ता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है. ऐसे में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. संदेह की स्थिति में पानी को उबालकर और छानकर पीना एक सरल व प्रभावी उपाय है. कैमिस्ट योगेंद्र का कहना है कि आरओ लगाने से पहले जल संस्थान की लैब में पानी की जांच अवश्य करवा लें. बिना आवश्यकता के आरओ लगाने से खर्च बढ़ता है और जरूरी खनिज भी कम हो सकते हैं.