नैनीताल. उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल घूमने आने वाले पर्यटक इन दिनों सिर्फ झीलों और पहाड़ों की खूबसूरती ही नहीं, बल्कि सड़कों पर घूमते बेहद मजबूत कद-काठी वाले आवारा कुत्तों को देखकर भी चौंक रहे हैं. मल्लीताल-तल्लीताल, माल रोड, बस स्टैंड और बाजारों में कई ऐसे स्ट्रीट डॉग्स दिखाई दे रहे हैं, जिनका शरीर मैदानों के शहरों में दिखने वाले कुत्तों से कहीं ज्यादा भारी और ताकतवर है. पहली नजर में कई लोग इन्हें पालतू विदेशी नस्ल समझ लेते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से अधिकांश सामान्य देसी कुत्ते ही हैं.
दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह पहाड़ों की जलवायु है. पशु विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंडे क्षेत्रों में जीवित रहने के लिए जानवरों का शरीर खुद को अनुकूलित (Biological Adaptation) कर लेता है. नैनीताल में साल के अधिकांश समय तापमान कम रहता है और सर्दियों में ठंड काफी बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में कुत्तों की त्वचा मोटी और फर घना हो जाता है, जिससे शरीर की गर्मी सुरक्षित रहती है.
इस वजह से नजर आते हैं ‘हट्टे-कट्टे’
ठंड के कारण उनके शरीर में फैट लेयर भी विकसित हो जाती है. यह ऊर्जा को संरक्षित रखती है और उन्हें ज्यादा मजबूत बनाती है. यही वजह है कि मैदानों में दुबले दिखने वाले देसी कुत्ते पहाड़ों में ‘हट्टे-कट्टे’ नजर आते हैं. इसके अलावा पर्यटन भी बड़ी वजह है. शहर में सालभर आने वाले सैलानियों के कारण होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों के आसपास खाने-पीने की पर्याप्त उपलब्धता रहती है. बचा हुआ भोजन और स्थानीय लोगों द्वारा नियमित खाना खिलाने से ये कुत्ते कुपोषित नहीं रहते. कुछ मामलों में स्थानीय पहाड़ी नस्लों से मेल-जोल भी इनके बड़े आकार का कारण माना जाता है. ऐसे में नए पिल्लों का शरीर ज्यादा मजबूत विकसित होता है. माल रोड पर तो एक बड़े कुत्ते के साथ पर्यटक फोटो खिंचवाते तक दिखाई देते हैं.