कॉर्बेट की वादियों में दिखा दुर्लभ लॉन्ग-टेल मिनिवेट, बर्ड वॉचर्स में खुशी की लहर

नैनीताल. उत्तराखंड का कॉर्बेट नेशनल पार्क सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों की अद्भुत दुनिया के लिए भी जाना जाता है. इन दिनों कॉर्बेट और उसके आसपास के जंगलों में एक बेहद आकर्षक और दुर्लभ पक्षी लॉन्ग-टेल मिनिवेट (Long-tailed Minivet) देखे जाने से पक्षी प्रेमियों और प्रकृति फोटोग्राफरों में खासा उत्साह है. इस खूबसूरत पक्षी की झलक पाने के लिए बर्ड वॉचर्स दूर-दूर से कॉर्बेट पहुंच रहे हैं.

 

वन्यजीव प्रेमी संजय छिम्वाल के अनुसार कॉर्बेट क्षेत्र में अब तक 600 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे यह इलाका भारत के प्रमुख बर्ड-वॉचिंग डेस्टिनेशन में गिना जाता है. हाल ही में देखे गए लॉन्ग-टेल मिनिवेट ने इस जैव विविधता को और खास बना दिया है. यह पक्षी आमतौर पर जंगल के ऊँचे पेड़ों की चोटियों पर रहना पसंद करता है और जमीन पर बहुत कम उतरता है. इसका मुख्य भोजन कीड़े-मकोड़े होते हैं, जिससे यह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कीटों की संख्या नियंत्रित कर यह प्राकृतिक “इकोलॉजिकल कंट्रोलर” का काम करता है.

 

दुर्लभ पक्षियों की पहली पसंद है कॉर्बेट

लॉन्ग-टेल मिनिवेट की सबसे खास बात इसका रंग-रूप है. इसमें स्पष्ट सेक्सुअल डाइमॉर्फ़िज़्म देखने को मिलता है. नर का रंग चटक लाल और काला होता है, जबकि मादा पीले-हरे रंग की दिखाई देती है. यही वजह है कि पेड़ों की हरियाली के बीच यह पक्षी आसानी से ध्यान खींच लेता है. कॉर्बेट क्षेत्र में हॉर्नबिल, बार्बेट, वुडपेकर समेत कई दुर्लभ पक्षी भी पाए जाते हैं, जिनकी वॉचर लिस्ट तैयार की जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील और सुंदर पक्षियों का दिखाई देना इस बात का संकेत है कि कॉर्बेट का जंगल अभी भी पर्यावरणीय रूप से स्वस्थ और सुरक्षित है. लॉन्ग-टेल मिनिवेट की मौजूदगी केवल बर्ड लवर्स के लिए खुशी नहीं, बल्कि यह जैव विविधता संरक्षण के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. यह बताता है कि यदि जंगल सुरक्षित रहें तो प्रकृति अपनी खूबसूरती खुद बयां कर देती है.

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