Nainital News: नैनीताल के जंगलों पर वन विभाग का ‘फायरप्रूफ’ सुरक्षा कवच, नहीं लगेगी आग

वन विभाग के अनुसार, इस फायर सीजन में संवेदनशील वन क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाएगी. जंगलों में फायर लाइनों की सफाई, पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) और सूखी झाड़ियों को हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है.

by Unfiltered Uttarakhand Desk
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नैनीताल. आने वाले गर्मी के मौसम और फायर सीजन को देखते हुए नैनीताल के जंगलों को वनाग्नि से सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने इस बार व्यापक और मजबूत फायर प्लान तैयार किया है. जंगलों पर “फायरप्रूफ” कवच चढ़ाने के उद्देश्य से विभाग ने रोकथाम, निगरानी और त्वरित कार्रवाई पर विशेष फोकस किया है, ताकि आग लगने की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके.

वन विभाग के अनुसार, इस फायर सीजन में संवेदनशील वन क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाएगी. जंगलों में फायर लाइनों की सफाई, पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) और सूखी झाड़ियों को हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. इसके साथ ही फायर वॉचर और वन कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे किसी भी घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके.

वन विभाग द्वारा कर ली गई है तैयारियां पूरी
नैनीताल वन प्रभाग के अंतर्गत इस बार कुल 70 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं. इन क्रू स्टेशनों पर फायर लाइन काटने का कार्य तेजी से चल रहा है. जंगलों की निगरानी के लिए एक मास्टर कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां से रियल-टाइम सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है. नैनीताल वन प्रभाग के डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि हर साल जंगलों में लगने वाली आग से करोड़ों रुपये की प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है. इसी को ध्यान में रखते हुए 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक विशेष फायर लाइन अभियान चलाया जा रहा है. मनौरा, दक्षिणी और उत्तरी गौला, बडौन, कोसी, नैना, भवाली, नगर पालिका रेंज और लीसा डिपो सहित संवेदनशील क्षेत्रों में कुल 280 वन रक्षकों की तैनाती की गई है.

ग्रामीणों और मंगल दलों को भी जोड़ा गया है
वन विभाग ने ग्राम प्रहरियों और मंगल दलों को भी इस अभियान से जोड़ा है. ग्रामीणों को आग की सूचना तुरंत देने और आपात स्थिति में आग बुझाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा. रेंज स्तर पर वायरलेस सेट उपलब्ध कराकर सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है. वन विभाग का दावा है कि सुनियोजित फायर प्लान, आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहभागिता के माध्यम से इस बार जंगलों में आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा.

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