नैनीताल में खुली पहली AI लैब, 75 रुपये में बच्चे सीखेंगे रोबोट और कोडिंग

यह AI लैब शहर के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में शुरू की गई है. यहां पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी तरह प्रैक्टिकल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा. बच्चों को बेसिक कंप्यूटर ज्ञान से आगे बढ़ाकर मशीन लर्निंग, कोडिंग, चैटबॉट बनाना, डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट तक सिखाया जाएगा.

by Unfiltered Uttarakhand Desk
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नैनीताल. पहाड़ के बच्चों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में सरोवर नगरी नैनीताल से एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है. यहां उत्तराखंड की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब की शुरुआत की गई है, जहां छात्र-छात्राएं बेहद कम शुल्क में आधुनिक तकनीक की शिक्षा हासिल कर सकेंगे. खास बात यह है कि इस लैब में प्रशिक्षण के लिए केवल 75 रुपये मासिक फीस रखी गई है, ताकि हर वर्ग का बच्चा इससे जुड़ सके.

यह AI लैब शहर के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में शुरू की गई है. यहां पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी तरह प्रैक्टिकल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा. बच्चों को बेसिक कंप्यूटर ज्ञान से आगे बढ़ाकर मशीन लर्निंग, कोडिंग, चैटबॉट बनाना, डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट तक सिखाया जाएगा. प्रशिक्षक विद्यार्थियों को वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम कराएंगे, जिससे वे आने वाली तकनीकी दुनिया के लिए तैयार हो सकें.

 

AI है आने वाला भविष्य

स्कूल की प्रधानाचार्य सिस्टर मंजूषा ने बताया कि दुनिया तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है और आने वाला समय AI का है. ऐसे में यदि बच्चों को कम उम्र से ही नई तकनीक से परिचित कराया जाए तो उनके करियर के अवसर कई गुना बढ़ जाएंगे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI इंसान की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को मजबूत करने के लिए है. फिलहाल कक्षा 4 से 9 तक के विद्यार्थियों को इस लैब में शामिल किया गया है. छात्राओं में भी इस पहल को लेकर खासा उत्साह है. कक्षा 9 की छात्रा दीपिका उप्रेती ने कहा कि पहले उन्होंने AI को केवल किताबों में पढ़ा था, लेकिन अब मशीनों और उपकरणों के साथ सीखने का मौका मिल रहा है. वहीं आराध्या कुमार का कहना है कि इतनी कम उम्र में प्रोग्रामिंग सीखना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है.

 

कम फीस में रोबोटिक्स सीखेंगे पहाड़ के बच्चे

डी’रोबोजोन इनोवेटिव सेंटर के डायरेक्टर अमित कुमार के अनुसार बच्चों को रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग, ड्रोन डिजाइनिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. भविष्य में इस पहल को अन्य स्कूलों तक भी पहुंचाने की योजना है. कम फीस और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ शुरू हुई यह AI लैब पहाड़ के बच्चों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.

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