नैनीताल. हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लगभग 30 हेक्टेयर रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा और रेलवे को अपनी जमीन का उपयोग करने का पूरा अधिकार है. इस फैसले से करीब 4500 मकानों में रह रहे 5236 परिवार प्रभावित होंगे.
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह भूमि रेलवे की संपत्ति है और इसे उसके नियमानुसार खाली कराया जाना चाहिए. हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों की पहचान कर पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाए. 19 मार्च से पुनर्वास के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे, जहां पात्र परिवारों का सर्वे कर उन्हें योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी. अदालत ने कहा कि यह गतिरोध अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता और 31 मार्च से पहले ठोस समाधान सामने आना चाहिए.
हजारों लोगों के भविष्य से जुड़ा फैसला
गौरतलब है कि साल 2022 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद प्रभावित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सुनवाई के दौरान रेलवे और राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि विस्थापित परिवारों को अगले छह महीने तक प्रति माह दो-दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. साथ ही, गरीब और अल्प आय वर्ग के परिवारों को प्राथमिकता देते हुए पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएंगे. यह फैसला हजारों लोगों के भविष्य से जुड़ा है. एक ओर रेलवे परियोजनाओं के लिए जमीन खाली कराने की तैयारी है, तो दूसरी ओर प्रशासन के सामने मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की चुनौती भी है. अब सबकी नजर अप्रैल में होने वाली अगली सुनवाई और सरकार की पुनर्वास योजना पर टिकी है.