हरिद्वार. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से रोके जाने को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के बीच उपजा विवाद नहीं थम रहा है. शंकराचार्य ने मंगलवार को भी मीडिया से बात की और पूरी स्थिति स्पष्ट की. वहीं उनके साथ हुई बदसलूकी पर संत समाज में आक्रोश है. उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा और भारत साधु समाज के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सांकेतिक धरना दिया. उन्होंने प्रयागराज प्रशासन की ओर से शंकराचार्य के साथ किए गए दुर्व्यवहार और उनके शिष्यों से बर्बरता को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया.
श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज में हुई घटना सनातन प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है. प्रयागराज प्रशासन ने सम्मानित पीठ के शंकराचार्य का अपमान किया है. उनके ब्रह्मचारी शिष्यों की शिखा पकड़कर खींचा गया, उन्हें पीटा गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है. ऐसा करने वाले अफसरों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए. उन्होंने मांग पूरी न होने पर अपनी शिखा कटवाने की भी चेतावनी दी.
जल्द से जल्द मांगें माफी
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन मंत्री स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि शंकराचार्य कौन बनेगा, यह प्रशासन तय नहीं कर सकता है. यह पद साधु-संतों की ओर से चुना जाता है. यह सरकार का विषय नहीं है. प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ पुलिस और प्रशासन ने जो कृत्य किया, वह बेहद निंदनीय है. इसके बावजूद अब तक शंकराचार्य से माफी नहीं मांगी गई है, यह बात कहीं न कहीं गंभीर सवाल खड़े करती है. योगी सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधिमंडल को जल्द से जल्द शंकराचार्य से भेंट कर माफी मांगनी चाहिए.
क्या है मामला?
प्रयागराज में 18 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के काफिले को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया था. पुलिस के ऐसा करने से मेला क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच बहस हुई और फिर धक्का-मुक्की होने लगी. पुलिस ने उनके शिष्यों को बर्बरता के साथ पीटा. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था. वहीं पुलिस प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों के साथ बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया.
शंकराचार्य की पदवी को लेकर नोटिस
शंकराचार्य पिछले तीन दिनों से माघ मेला के सेक्टर-4 स्थित शिविर के बाहर अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर ही बैठे हैं. प्रयागराज माघ मेला विकास प्राधिकरण द्वारा मंगलवार को शंकराचार्य के शिविर के बाहर उनकी पदवी को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है. 24 घंटे में उनकी शंकराचार्य की पदवी पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है.